बिहार में खाद्य प्रसंस्करण की इकाइयां लगाने को निजी निवेशकों ने रुचि दिखाई है। करीब 450 करोड़ रु. के निवेश प्रस्ताव आए हैं। निजी निवेशकों को लुभाने को उद्योग विभाग ने हाल ही में कई राज्यों में रोड-शो किए। विभाग को उम्मीद है कि उसके इन प्रयासों से राज्य में करीब 1500 करोड़ का निजी निवेश लाने में सफलता मिलेगी।
जानकारी के मुताबिक सबसे अधिक रुचि दिल्ली की धानुका पेस्टिसाइड्स ने दिखाई है। हाजीपुर एवं मुजफ्फरपुर में फ्रूट एंड वेजीटेबुल सेंटर के अलावा वेजीटेबुल प्रोसेसिंग यूनिट एवं एग्री माल स्थापित करने को 100 करोड़ रुपये के प्रस्ताव कम्पनी ने दिए हैं। कोलकाता की बिहार एग्रो प्रोजेक्ट्स ने भागलपुर में 75 करोड़ की लागत से फूड पार्क, दिल्ली की ईरा एग्रीटेक ने 84.70 करोड़ की लागत से एग्रो बिजनेस सेंटर तथा प्राइमरी प्रोसेसिंग सेंटर और यूपी के राधे श्याम कोल्ड स्टोरेज एवं फूड्स ने मधुबनी में 9.61 करोड़ की लागत से फ्रूट पल्प एवं जूस प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया है। बिहार के निजी निवेशकों ने भी रुचि ली है। इनमें हाजीपुर की राकेश ईटेबुल्स एवं पटना की आम्रपाली फूड्स प्रमुख फर्म हैं।
फूड प्रोसेसिंग यूनिट को बढ़ावा देने को सरकार ने वर्ष 2008 में नई नीति लागू की है जिसके तहत निवेशकों को 80 प्रतिशत वैट वापसी तथा 50 फीसदी कैपिटल सब्सिडी देने का प्रावधान है।
उद्योग विभाग ने निजी निवेशकों को आकर्षित करने को जून से सितंबर माह के बीच कोलकाता, बंगलोर, दिल्ली एवं वाराणसी में रोड शो किये। रोड शो के दौरान ही फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के 56 प्रस्ताव आए जिनकी समीक्षा की जा रही है। विभाग वैशाली एवं कटिहार में फूड पार्क की स्थापना करना चाहता है। इसके लिए निजी निवेशकों से संपर्क किया जा रहा है। विभाग निजी निवेशकों को 51 प्रतिशत शेयर देकर उन्हें मालिकाना हक भी देना चाहता है। फल एवं सब्जी उत्पादन में चीन के बाद भारत का स्थान सबसे ऊपर है। देश के कुल फल एवं सब्जी उत्पादन में बिहार का बड़ा योगदान है। इसी क्षमता को देख विभाग ने फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने का बीड़ा उठाया है।
Wednesday, October 28, 2009
सूबे में नहीं लागू होगा बटाईदार कानून
डा.श्रीकृष्ण सिंह जयंती के अवसर पर मंगलवार को आयोजित एक समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पष्ट कहा कि जब पश्चिम बंगाल की मार्क्सवादी सरकार भूमि सुधार के तहत बटाईदार कानून को लागू नहीं कर सकी तो बिहार में इसके लागू होने का सवाल ही नहीं पैदा होता। उन्होंने कहा कि सरकार श्री बाबू की जीवनी प्रकाशित कराएगी। उन्होंने कहा कि श्री बाबू स्वतंत्रता संग्राम के अप्रतिम योद्धा एवं प्रकाण्ड विद्वान थे। अपने संघर्ष और तप की बदौलत उन्होंने देश को आजाद कराया। श्री बाबू ने बिहार में विकास की नींव रखी। वे नायक थे, नई पीढ़ी को उनकी जीवनी से प्रेरणा लेनी चाहिये। सरकार श्रीकृष्ण सिंह की 125 वीं जयंती विस्तृत कार्यक्रम के साथ मनायेगी।
श्रीकृष्ण ज्ञान मंदिर और श्रीकृष्ण विज्ञान केन्द्र के तत्वावधान में आयोजित श्रीकृष्ण जन्म शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण विज्ञान केन्द्र बच्चों की प्रतिभा को बढ़ा रहा है, जो सराहनीय है। श्रीकृष्ण विज्ञान केन्द्र के माध्यम से अंधविश्वास को दूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 1500 साल पहले विश्व प्रसिद्ध खगोलशास्त्री आर्यभट्ट तारेगना में पैदा हुए थे और वे तारों की गणना करते थे। वे खगौल में खगोलीय घटनाओं का अध्ययन करते थे। श्री कुमार ने बताया कि सूर्यग्रहण के दौरान एक ब्राह्मण वैज्ञानिक ने बिस्किट खाने के लिए प्रोत्साहित किया और हमने खा लिया। इसपर विपक्षियों ने यह भ्रम फैलाया कि बिस्किट खाने से राज्य में अकाल पड़ गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे समाज को जोड़ने का काम करते है, तोड़ने का नहीं। श्री बाबू से प्रेरणा लेकर बिहार को हमलोगों ने आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि पूरा देश बिहार का अनुकरण कर रहा है। सूचना के अधिकार के क्रियान्वयन का अनुकरण कांग्रेस शासित राज्यों में की जा रही है। श्री कुमार ने कहा कि साढ़े तीन वर्ष पूर्व जब राज्य में पंचायत और नगर निकाय चुनाव में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया तो लोग मजाक उड़ाया करते थे। आज केन्द्र सरकार ने यह निर्णय लिया है कि पूरे देश में पंचायत एवं नगर निकाय चुनाव में महिलाओं को पचास फीसदी आरक्षण दिया जाएगा।
डा.श्रीकृष्ण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संसदीय कार्य मंत्री श्री रामाश्रय प्रसाद सिंह ने कहा कि बटाईदारी कानून के बारे में बंदोपाध्याय कमेटी ने गलत अनुशंसाएं की हैं। श्री सिंह ने कहा कि राज्य को गौरवान्वित एवं विकसित करने का प्रयास श्रीकृष्ण बाबू के बाद नीतीश कुमार ने ही किया है। श्री बाबू के रास्ते पर चलकर वे बिहार का विकास कर रहे हैं। कांग्रेस विधायक दल के नेता डा. अशोक कुमार ने कहा कि श्रीबाबू 50 वर्ष आगे की सोचते थे। श्री बाबू ने अपने अनुभव के आधार पर बटाईदारी कानून की बात रखी थी, अगर ये योजना उस वक्त लागू होती तो नक्सलवाद की समस्या नहीं आती। श्रीकृष्ण विज्ञान केन्द्र के अध्यक्ष श्री एलपी शाही ने कहा कि अन्य राज्यों की तरह हमें अपनी सांस्कृतिक परंपरा को अक्षुण्ण रखना होगा। श्री शाही ने कहा कि डा. श्रीकृष्ण सिंह की बायोग्राफी लिखने वालों को एक लाख का पारितोषक दिया जाएगा। पूर्व मंत्री विश्वमोहन शर्मा ने श्री बाबू को युगद्रष्टा बताया।
श्रीकृष्ण ज्ञान मंदिर और श्रीकृष्ण विज्ञान केन्द्र के तत्वावधान में आयोजित श्रीकृष्ण जन्म शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण विज्ञान केन्द्र बच्चों की प्रतिभा को बढ़ा रहा है, जो सराहनीय है। श्रीकृष्ण विज्ञान केन्द्र के माध्यम से अंधविश्वास को दूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 1500 साल पहले विश्व प्रसिद्ध खगोलशास्त्री आर्यभट्ट तारेगना में पैदा हुए थे और वे तारों की गणना करते थे। वे खगौल में खगोलीय घटनाओं का अध्ययन करते थे। श्री कुमार ने बताया कि सूर्यग्रहण के दौरान एक ब्राह्मण वैज्ञानिक ने बिस्किट खाने के लिए प्रोत्साहित किया और हमने खा लिया। इसपर विपक्षियों ने यह भ्रम फैलाया कि बिस्किट खाने से राज्य में अकाल पड़ गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे समाज को जोड़ने का काम करते है, तोड़ने का नहीं। श्री बाबू से प्रेरणा लेकर बिहार को हमलोगों ने आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि पूरा देश बिहार का अनुकरण कर रहा है। सूचना के अधिकार के क्रियान्वयन का अनुकरण कांग्रेस शासित राज्यों में की जा रही है। श्री कुमार ने कहा कि साढ़े तीन वर्ष पूर्व जब राज्य में पंचायत और नगर निकाय चुनाव में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया तो लोग मजाक उड़ाया करते थे। आज केन्द्र सरकार ने यह निर्णय लिया है कि पूरे देश में पंचायत एवं नगर निकाय चुनाव में महिलाओं को पचास फीसदी आरक्षण दिया जाएगा।
डा.श्रीकृष्ण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संसदीय कार्य मंत्री श्री रामाश्रय प्रसाद सिंह ने कहा कि बटाईदारी कानून के बारे में बंदोपाध्याय कमेटी ने गलत अनुशंसाएं की हैं। श्री सिंह ने कहा कि राज्य को गौरवान्वित एवं विकसित करने का प्रयास श्रीकृष्ण बाबू के बाद नीतीश कुमार ने ही किया है। श्री बाबू के रास्ते पर चलकर वे बिहार का विकास कर रहे हैं। कांग्रेस विधायक दल के नेता डा. अशोक कुमार ने कहा कि श्रीबाबू 50 वर्ष आगे की सोचते थे। श्री बाबू ने अपने अनुभव के आधार पर बटाईदारी कानून की बात रखी थी, अगर ये योजना उस वक्त लागू होती तो नक्सलवाद की समस्या नहीं आती। श्रीकृष्ण विज्ञान केन्द्र के अध्यक्ष श्री एलपी शाही ने कहा कि अन्य राज्यों की तरह हमें अपनी सांस्कृतिक परंपरा को अक्षुण्ण रखना होगा। श्री शाही ने कहा कि डा. श्रीकृष्ण सिंह की बायोग्राफी लिखने वालों को एक लाख का पारितोषक दिया जाएगा। पूर्व मंत्री विश्वमोहन शर्मा ने श्री बाबू को युगद्रष्टा बताया।
Monday, October 12, 2009
जमीन पर नहीं उतरे 96 हजार करोड़ के प्रस्ताव
बिहार के पिछड़ेपन को बहुत हद तक मिटा देने के लिए काफी माने गए निजी निवेश के करीब 96,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव जमीन पर नहीं उतर पाए। मुख्य रूप से ऊर्जा एवं कृषि के क्षेत्र में आए इन प्रस्तावों को दो साल पूर्व ही राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद की मंजूरी मिल चुकी है। पिछले साल दो चीनी मिलों में रिलायंस और एचपीसीएल के लगे 600 करोड़ रुपये के अलावा अब तक ठोस निजी निवेश के रूप में प्रदेश में कोई अन्य राशि नहीं आयी है। आधारभूत संरचना की कमी और प्रशासनिक तंत्र की शिथिलता इसके लिए प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
राज्य सरकार ने सत्ता संभालते ही आधारभूत संरचना के विकास के लिए अलग से एक कानून-'बिहार इंफ्रास्ट्रक्चर एनेब्लिंग एक्ट', बनाया। इस कानून के तहत वर्ष 2007 में इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप्मेंट आथरिटी का गठन किया। आईडीए को निजी निवेशकों को हर प्रकार की मदद के अलावा उन्हें भूमि उपलब्ध कराने के लिए 'लैंड बैंक' बनाना है। लेकिन अब तक लैंड बैंक के पास एक एकड़ जमीन भी उपलब्ध नहीं हो सकी है। अफसरशाही की शिथिलता के कारण ही निवेशकों के लिए सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'सिंगल विंडो सिस्टम' लागू नहीं हो पायी है। आईडीए को आज तक पूर्णकालिक प्रबंध निदेशक भी नहीं मिला है। उद्योग विभाग से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि निजी निवेशकों ने दो साल पूर्व प्रदेश में निवेश के प्रति रुचि दिखाई। सुनील मित्तल,आनंद महिंद्रा जैसे कई बड़े उद्योगपति स्वयं मुख्यमंत्री से मिलने आए। लेकिन इस मौके का लाभ अफसरों ने उठाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। उद्योगों के लिए सबसे अहम आधारभूत संरचना समझी जाने वाली सड़क और बिजली की स्थिति दुरुस्त नहीं की जा सकी है।
केन्द्र की नीतियों का भी प्रदेश में निवेश पर काफी प्रभाव पड़ा है। नेफ्था एवं इथनाल की इकाई लगाने की केन्द्र ने मंजूरी नहीं दी। राज्य सरकार ने बिजली संकट दूर करने के लिए अपनी थर्मल इकाई लगाने की योजना बनायी है, जिसे केंद्र से अब तक 'कोल-लिंकेज' की सुविधा नहीं मिल रही है। परन्तु, बिजली का संकट दूर करने के लिए आए अन्य प्रस्ताव तो प्रदेश की अफसरशाही की ही नजर हो गए। 'सोलर इनर्जी' से सचिवालय सहित अन्य सरकारी दफ्तरों में बिजली सप्लाई का प्रस्ताव ऊर्जा विभाग में धूल चाट रहा है। सोलर इनर्जी के कारण थर्मल बिजली का बड़ा हिस्सा बचाया जा सकता था, जिससे सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण कार्य लिए जा सकते हैं। नक्सल गतिविधियां पर नियंत्रण न पाना भी एक अड़चन है। इसके कारण औरंगाबाद एवं गया जैसे जिलों में काफी जमीन रहने के बावजूद उसका अधिग्रहण नहीं किया जा रहा। गया में तो टेकारी के निकट पुराना हवाई अड्डा वैसे ही बेकार पड़ा है। उद्योग विभाग ने खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए दक्षिण भारत के कुछ शहरों में पिछले माह रोड-शो आयोजित किये थे। उत्साहित विभाग को 1500 करोड़ के निजी निवेश की उम्मीद है।
राज्य सरकार ने सत्ता संभालते ही आधारभूत संरचना के विकास के लिए अलग से एक कानून-'बिहार इंफ्रास्ट्रक्चर एनेब्लिंग एक्ट', बनाया। इस कानून के तहत वर्ष 2007 में इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप्मेंट आथरिटी का गठन किया। आईडीए को निजी निवेशकों को हर प्रकार की मदद के अलावा उन्हें भूमि उपलब्ध कराने के लिए 'लैंड बैंक' बनाना है। लेकिन अब तक लैंड बैंक के पास एक एकड़ जमीन भी उपलब्ध नहीं हो सकी है। अफसरशाही की शिथिलता के कारण ही निवेशकों के लिए सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'सिंगल विंडो सिस्टम' लागू नहीं हो पायी है। आईडीए को आज तक पूर्णकालिक प्रबंध निदेशक भी नहीं मिला है। उद्योग विभाग से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि निजी निवेशकों ने दो साल पूर्व प्रदेश में निवेश के प्रति रुचि दिखाई। सुनील मित्तल,आनंद महिंद्रा जैसे कई बड़े उद्योगपति स्वयं मुख्यमंत्री से मिलने आए। लेकिन इस मौके का लाभ अफसरों ने उठाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। उद्योगों के लिए सबसे अहम आधारभूत संरचना समझी जाने वाली सड़क और बिजली की स्थिति दुरुस्त नहीं की जा सकी है।
केन्द्र की नीतियों का भी प्रदेश में निवेश पर काफी प्रभाव पड़ा है। नेफ्था एवं इथनाल की इकाई लगाने की केन्द्र ने मंजूरी नहीं दी। राज्य सरकार ने बिजली संकट दूर करने के लिए अपनी थर्मल इकाई लगाने की योजना बनायी है, जिसे केंद्र से अब तक 'कोल-लिंकेज' की सुविधा नहीं मिल रही है। परन्तु, बिजली का संकट दूर करने के लिए आए अन्य प्रस्ताव तो प्रदेश की अफसरशाही की ही नजर हो गए। 'सोलर इनर्जी' से सचिवालय सहित अन्य सरकारी दफ्तरों में बिजली सप्लाई का प्रस्ताव ऊर्जा विभाग में धूल चाट रहा है। सोलर इनर्जी के कारण थर्मल बिजली का बड़ा हिस्सा बचाया जा सकता था, जिससे सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण कार्य लिए जा सकते हैं। नक्सल गतिविधियां पर नियंत्रण न पाना भी एक अड़चन है। इसके कारण औरंगाबाद एवं गया जैसे जिलों में काफी जमीन रहने के बावजूद उसका अधिग्रहण नहीं किया जा रहा। गया में तो टेकारी के निकट पुराना हवाई अड्डा वैसे ही बेकार पड़ा है। उद्योग विभाग ने खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए दक्षिण भारत के कुछ शहरों में पिछले माह रोड-शो आयोजित किये थे। उत्साहित विभाग को 1500 करोड़ के निजी निवेश की उम्मीद है।
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